का सरल उत्तर
कोई भी कर्मकांड पूर्णतः त्रुटिहीन नहीं होता — उच्चारण दोष, द्रव्य कमी, मन भटकाव संभव है। इसलिए अंत में क्षमा प्रार्थना अनिवार्य है। मंत्र: 'करचरणकृतं वाक् कायजं... सर्वमेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो।'
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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