का सरल उत्तर
धनुष भंग और जयमाला के बाद विवाह की औपचारिक प्रक्रिया के लिये। दशरथ को बारात लेकर आने का निमन्त्रण। वसिष्ठजी ने कहा — 'राजन राम सरिस सुत जाकें' — राम जैसे पुत्र हैं, बारात सजाओ।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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