'सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन' — ऐसे भक्तों की क्या विशेषता बताई?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
ऐसे निष्काम भक्तों ने रामनाम के प्रेमरूपी अमृत-सरोवर में अपने मन को मछली बना रखा है — जैसे मछली जल से अलग नहीं हो सकती, वैसे ही वे क्षणभर भी नाम-प्रेम से अलग नहीं होते। वे भोग और मोक्ष दोनों की कामना से रहित हैं।
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रामचरितमानस — बालकाण्ड
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