का सरल उत्तर
सपिंडीकरण से — प्रेत 'पितर' बन जाता है, प्रेत-शरीर से मुक्ति मिलती है, पारिवारिक पितर-श्रेणी में प्रवेश होता है और धर्मराज की सभा में आदरपूर्ण स्थान मिलता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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