का सरल उत्तर
शिवजी ने मन-ही-मन सतीजी का पत्नी रूप में त्याग करने का संकल्प किया — 'एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं।' कारण — सतीजी ने सीता रूप धारा, अतः शिवजी की दृष्टि में वे माता समान हो गयीं। प्रकट में कुछ नहीं कहा पर हृदय में बड़ा सन्ताप था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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