का सरल उत्तर
सतीजी कैलास पर रहती थीं, मन में बड़ा दुख था। 'जुग सम दिवस सिराहिं' — एक-एक दिन युग समान बीतता था। वे सोचती थीं कि मैंने रघुपति का अपमान किया और पति के वचन झूठ माने — उसका फल मिल रहा है। इस रहस्य को कोई नहीं जानता था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।