तुलसीदासजी ने सत्संग की तुलना पारस पत्थर से क्यों की?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
पारस लोहे को सोना बनाता — वैसे सत्संग अज्ञानी को ज्ञानी। 'बिनु सतसंग बिबेक न होई' — सत्संग बिना विवेक नहीं।
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रामचरितमानस — बालकाण्ड
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