का सरल उत्तर
काशी के एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण और एक भील (लकड़हारे) ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया था, जिससे उनकी दरिद्रता दूर हुई। यह कथा बताती है कि भगवान के सामने कोई अमीर-गरीब या छोटी-बड़ी जात नहीं होती।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।