का सरल उत्तर
शक्तिपात गुरु की कृपा का वह रूप है जो शिष्य में संचारित होकर सोई कुंडलिनी जाग्रत करती है और साधना के विघ्नों से रक्षा करती है — मोक्ष केवल इसी गुरु-कृपा से संभव है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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