का सरल उत्तर
भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आने को तैयार हुई, लेकिन उनके प्रचंड वेग से पृथ्वी नष्ट हो जाती। भगीरथ ने शिव से विनती की। शिव ने जटाएं खोलकर गंगा को समेट लिया और उनका अहंकार चूर किया, फिर एक धारा भागीरथी के रूप में धरती पर उतारी।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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