का सरल उत्तर
कपाली रूप में शिव (भैरव) ब्रह्मा का कपाल हाथ में लेकर तीनों लोकों में भिक्षाटन करते हैं — यह ब्रह्महत्या के प्रायश्चित का प्रतीक है। काशी में कपाल गिरने से मुक्ति मिली, वहीं कपाल मोचन तीर्थ बना और भैरव काशी के कोतवाल बने।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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