का सरल उत्तर
शिव का श्लोक: 'अहं शिवः...सर्व शिवमयं ब्रह्म शिवात पर न किंचन।' अर्थ: मैं शिव, तुम शिव, सब कुछ शिवमय। संपूर्ण प्रकृति (पंचभूत, सूर्य, चंद्र, जीव) शिव का ही विस्तार है। 'सोऽहं' = मैं ही शिव हूँ — अद्वैत ज्ञान।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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