का सरल उत्तर
दो कारण — (1) सीताजी जगन्माता हैं, उनका रूप धारण करने वाली से पति-भाव रखना भक्तिमार्ग के विरुद्ध है, (2) शिवजी ने कहा 'मिटइ भगति पथु होइ अनीती' — भक्तिमार्ग नष्ट हो जायेगा। सतीजी पवित्र थीं इसलिये प्रकट में कुछ नहीं कहा, बस मन में त्याग किया।