का सरल उत्तर
शिवजी ने 'सच्चिदानन्द परमधाम' कहकर हृदय से प्रणाम किया। सतीजी से कहा — 'सोइ मम इष्टदेव रघुबीरा' — ये वही मेरे इष्टदेव श्रीरघुवीर हैं जिनकी कथा अगस्त्य ऋषि ने गाई और जिनकी सेवा ज्ञानी मुनि सदा करते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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