का सरल उत्तर
पिंडदान = श्राद्ध का एक अंग — केवल अन्न-पिंड अर्पित करना। श्राद्ध = व्यापक पितृ-कर्म जिसमें पिंडदान + तर्पण + ब्राह्मण-भोजन + दान-दक्षिणा सभी शामिल हैं। पिंडदान श्राद्ध के बिना भी हो सकता है, परंतु पूर्ण श्राद्ध में पिंडदान होता ही है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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