का सरल उत्तर
श्राद्ध के मुख्य चार भेद हैं — पार्वण, एकोद्दिष्ट, नान्दीमुख यानी वृद्धिश्राद्ध, और सपिण्डीकरण। पार्वण श्राद्ध तीन पीढ़ियों का सामूहिक आवाहन वाला, एकोद्दिष्ट एक पितर के लिए वार्षिक क्षयाह, नान्दीमुख शुभ अवसरों पर वृद्धि के लिए, और सपिण्डीकरण मृत्यु के बाद आत्मा को पितरों में मिलाने के लिए। द्वितीया पर पार्वण और एकोद्दिष्ट दोनों होते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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