का सरल उत्तर
सर्वज्ञ भगवान ने सतीजी का कपट तुरन्त जान लिया। हाथ जोड़कर प्रणाम किया, पितासहित अपना नाम बताया और पूछा — 'वृषकेतु (शिवजी) कहाँ हैं? आप वन में अकेली क्यों फिर रही हैं?' — यह सुनकर सतीजी को अत्यन्त लज्जा और संकोच हुआ।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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