का सरल उत्तर
गुरु विश्वामित्रजी के चरणकमलों को मन में प्रणाम किया, साथ ही गुरुजनों, माता-पिता और शिवजी को। फिर सहज भाव से धनुष उठाया। सर्वशक्तिमान होकर भी विनम्रता — मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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