का सरल उत्तर
एक ही बाण से — 'एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥' — एक बाण से प्राण हरे और दीन जानकर निजपद (मुक्ति) दिया। भगवान शत्रु को मारकर भी कल्याण करते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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