विस्तृत उत्तर
श्रीरामजी ने ताड़का का वध एक ही बाण से किया।
चौपाई — 'एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥'
अर्थ — श्रीरामजीने एक ही बाणसे उसके प्राण हर लिये और दीन जानकर उसको निजपद (अपना दिव्य धाम/मुक्ति) दिया।
विश्वामित्रजी ने मार्ग में चलते हुए ताड़का को दिखलाया। शब्द सुनते ही वह क्रोध से दौड़ी आयी। श्रीरामजी ने बिना किसी संकोच के एक ही बाण से उसका वध कर दिया।
विशेष बात — श्रीरामजी ने ताड़का को 'दीन' (दयनीय) जानकर उसे अपना दिव्य पद (मुक्ति) प्रदान किया। भगवान का यह स्वभाव है कि वे शत्रु को मारकर भी उसका कल्याण करते हैं।





