का सरल उत्तर
राजा जनक ने — 'गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी' — कुश हाथ में लेकर कन्या का हाथ पकड़कर भवानी (सीता) को भव (राम) को समर्पित किया। सीता-राम को शिव-पार्वती समान माना।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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