का सरल उत्तर
सीताजी ने पार्वतीजी की स्तुति की — 'जय जय गिरिबरराज किसोरी' — और कहा कि मेरा मनोरथ आप जानती हैं, आप सबके हृदय में बसती हैं, इसलिये प्रकट नहीं किया। चरण पकड़कर मनोवांछित वर (रामजी) की प्रार्थना की।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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