का सरल उत्तर
सकुचाहट + प्रेम + आनन्द — गुरुजनों की लाज से सकुचाईं पर धीरज धरा। मन में कहा — 'तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चित राचा' — मेरा प्रण सच्चा है, चित्त रघुपति के चरणों में अनुरक्त है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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