सीताजी ने माता पार्वती से कैसा वर माँगा?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
सीताजी ने सीधे शब्दों में नहीं कहा — 'मोर मनोरथु जानहु नीकें' — मेरा मनोरथ आप जानती हैं। नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — रामजी उनके वर बनें, यही हृदय भाव से प्रार्थना।
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रामचरितमानस — बालकाण्ड
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