का सरल उत्तर
मार्जन = जल छिड़ककर बाह्य शुद्धि ('ॐ आपो हि ष्ठा...' मंत्र से शरीर पर)। प्राशन = जल का आचमन करके आन्तरिक शुद्धि। अघमर्षण = 'ॐ ऋतं च सत्यं च...' मंत्र से पाप नाश — हाथ में जल लेकर, नासिका से लगाकर, पाप बाहर निकालने की भावना से बाईं ओर फेंकें। तीनों = गायत्री जप की तैयारी।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।