का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण और कठोपनिषद में बताया गया है कि मृत्यु के समय शरीर से अंगूठे के बराबर (अंगुष्ठ मात्र) जीवात्मा निकलती है। यह प्रतीकात्मक वर्णन उस सूक्ष्म चेतना का संकेत है जो शरीर त्यागती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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