का सरल उत्तर
ताड़का एक भयानक राक्षसी थी — सुकेतु यक्ष की कन्या (वाल्मीकि रामायण अनुसार)। विश्वामित्रजी के यज्ञ क्षेत्र के मार्ग में रहती थी। रामजी ने एक ही बाण से उसके प्राण हरे और दीन जानकर निजपद (मुक्ति) दिया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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