तर्पण और मार्जन के मंत्र और उनकी विधि
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
तर्पण का अर्थ देवताओं या पितरों को जल देकर तृप्त करना है ('अमुक देवतां तर्पयामि')। मार्जन का अर्थ मंत्रोच्चार के साथ स्वयं पर जल छिड़ककर शारीरिक और सूक्ष्म शुद्धि करना है। दोनों अनुष्ठान के अनिवार्य अंग हैं।
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