का सरल उत्तर
श्रीरामजी की बाललीला — जब वे ठुमक-ठुमककर चलते और माता कौशल्या बुलाने जातीं तो भागते। 'निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरैं जननी हठि धावा' — जिनका अन्त वेद और शिव भी नहीं पाते, उन्हें माता हठ से पकड़ने दौड़तीं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।