का सरल उत्तर
ईशावास्योपनिषद (1-2) — 'त्याग-भाव से भोगो, कर्म करते हुए जियो।' तैत्तिरीय (1/11) — 'सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः।' छान्दोग्य (7/26) — 'आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः।' उपनिषदों में आध्यात्मिक जीवन = कर्तव्य + वैराग्य + ध्यान + ब्रह्म-स्मरण।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।