का सरल उत्तर
उपनिषदों में ध्यान ब्रह्म-साक्षात्कार की प्रत्यक्ष विधि है। छान्दोग्य (7/6) — 'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः' — ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। माण्डूक्य में 'तुरीय' अवस्था ध्यान की परिणति है। कठोपनिषद (2/24) कहता है — आत्मा बुद्धि से नहीं, एकाग्र ध्यान से मिलती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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