का सरल उत्तर
भगवान वराह ने पिण्डदान तब शुरू किया जब उन्होंने हिरण्याक्ष नामक महादैत्य का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला। उनकी दाढ़ से दक्षिण दिशा की ओर गिरे मृदा अंश से तीन पिण्ड बनाकर, कुशा के ऊपर स्थापित कर, उन्हें पिता, पितामह और प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक घोषित किया। यह सम्पूर्ण जगत में पिण्डदान की पवित्र परम्परा का आरंभ था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।