का सरल उत्तर
वैदिक काल में पशु-धन को सर्वोच्च सम्पत्ति माना जाता था। कृषि प्रधान और गौ-आधारित वैदिक समाज में गाय, बैल, घोड़ा आदि पशु आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक जीवन के मूल आधार थे। गाय दूध, घी, मूत्र, गोबर - सब देती थी। बैल कृषि का आधार था। गाय की संख्या से धन की गणना होती थी। इसी कारण द्वितीया श्राद्ध का पशू वै फल अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।
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