का सरल उत्तर
इस व्रत को करने से दस हजार साल की तपस्या, अश्वमेध यज्ञ, सूर्य ग्रहण के समय सोना दान करने और कन्यादान करने से भी ज्यादा पुण्य मिलता है। इसका पुण्य इतना है कि चित्रगुप्त भी उसका हिसाब नहीं लगा सकते।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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