का सरल उत्तर
वेदों में यज्ञ देव-मनुष्य परस्पर-सम्बन्ध का सेतु है। ऋग्वेद (1/1/1) का प्रथम श्लोक अग्नि-यज्ञ से आरंभ होता है। गीता (3/14-16) में वर्षा-अन्न-जीवन-यज्ञ का ब्रह्मांडीय चक्र बताया गया है। पाँच महायज्ञ प्रत्येक गृहस्थ का नित्य-कर्तव्य है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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