का सरल उत्तर
वीर-भाव में साधक भीतर के अंधकार, भय और घृणा का सीधे सामना करता है — वर्जित परिस्थितियों में भी समभाव रखकर द्वैत जीतने की कठोर साधना करता है। शव साधना इसी की सर्वोच्च परीक्षा है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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