विश्वामित्रजी ने श्रीरामजी से धनुष तोड़ने के लिये क्या कहा?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, शिवजी का धनुष तोड़ो, जनक का सन्ताप मिटाओ। गुरु की आज्ञा पर रामजी उठे और सहज भाव से धनुष तोड़ दिया।
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रामचरितमानस — बालकाण्ड
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