का सरल उत्तर
पार्वतीजी ने कैलास पर शिवजी से रामकथा सुनने की जिज्ञासा प्रकट की। शिवजी ने पहले शम्भु चरित्र (विवाह कथा) संक्षेप में कहा, फिर रामावतार की कथा सुनानी शुरू की। भरद्वाजजी (याज्ञवल्क्यजी के माध्यम से) यह सुनकर अति प्रसन्न हुए।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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