का सरल उत्तर
तीर्थराज प्रयाग (प्रयागराज) में, भरद्वाजजी के आश्रम में। माघ मेले के अवसर पर मुनि एकत्र होते थे — एक बार स्नान के बाद भरद्वाजजी ने याज्ञवल्क्यजी को रोककर रामकथा सुनने की प्रार्थना की।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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