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सरल उत्तर

याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 में क्या कहा गया है?

का सरल उत्तर

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याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 का श्लोक है कन्यां कन्यावेदिनश्च पशून् वै सुसतानपि। द्यूतं कृषिं च वाणिज्यं द्विशफं चैकशफं तथा। यह श्लोक प्रतिपदा से अष्टमी तक की तिथियों के काम्य फल बताता है। द्वितीया का विशेष फल कन्यावेदिन यानी सुयोग्य दामाद और पशू वै यानी प्रचुर पशु-धन है। यह श्लोक नृसिंह प्रसाद-श्राद्धसारः ग्रन्थ में विस्तार से व्याख्यायित है।

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