का सरल उत्तर
श्राद्ध में जनेऊ अपसव्य अवस्था में पहना जाता है, अर्थात् दाएं कंधे पर और बाएं हाथ के नीचे। यह देव कार्य के सव्य बाएं कंधे पर से भिन्न है। शास्त्रों ने इसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण कहा है। पितरों का तर्पण इसी अवस्था में किया जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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