का सरल उत्तर
ऋग्वेद = होता का वेद — देवताओं की स्तुति और आह्वान। अथर्ववेद = ब्रह्मा (यज्ञ अध्यक्ष) का वेद — निरीक्षण, त्रुटि सुधार, मन से यज्ञ का दूसरा पक्ष संस्कारित। ऐतरेय ब्राह्मण: वेदत्रयी वाक् से, ब्रह्मा मन से यज्ञ पूर्ण करता है। दोनों अनिवार्य।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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