का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग 'विश्रामरहित' है — पापी को कहीं रुकने नहीं दिया जाता। पुण्यात्मा और पिंडदान प्राप्त जीव को 16 पड़ावों पर कुछ राहत मिलती है। पापी के लिए यह निरंतर कष्टयात्रा है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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