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यममार्ग में जीव को किन स्थानों पर विश्राम मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग 'विश्रामरहित' है — पापी को कहीं रुकने नहीं दिया जाता।

संक्षिप्त उत्तर

गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग 'विश्रामरहित' है — पापी को कहीं रुकने नहीं दिया जाता। पुण्यात्मा और पिंडदान प्राप्त जीव को 16 पड़ावों पर कुछ राहत मिलती है। पापी के लिए यह निरंतर कष्टयात्रा है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में यममार्ग के संबंध में जो वर्णन मिलता है उसके अनुसार पापी जीव के लिए इस मार्ग पर विश्राम का कोई स्थान नहीं है। यह उल्लेख विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।

गरुड़ पुराण के द्वितीय अध्याय में स्पष्ट कहा गया है — 'तपी हुई बालू से पूर्ण तथा विश्रामरहित और जलरहित मार्ग पर।' अर्थात् यह मार्ग 'विश्रामरहित' (बिना विश्राम के) है।

पापी जीव के लिए — थककर गिरने पर भी यमदूत उसे उठाकर आगे धकेलते हैं। बेहोश होने पर भी यात्रा नहीं रुकती। यह 'अविश्राम' ही उसकी एक विशेष यातना है।

पुण्यात्मा के लिए — पुण्यात्माओं के यात्रा-मार्ग में कुछ विश्राम के स्थान बताए गए हैं। 16 पड़ावों पर जीव रुकता है जिन्हें 'पुर' (नगर) कहा गया है। इन स्थानों पर पिंडदान पाने वाले जीव को कुछ राहत मिलती है।

सौम्यपुर — गरुड़ पुराण में 'सौम्यपुर' नामक स्थान का उल्लेख है जहाँ यात्रा में पहली बड़ी रुकावट होती है। यहाँ से आगे की यात्रा और भिन्न होती है।

इस प्रकार विश्राम केवल पुण्यकर्मियों के लिए है — पापी के लिए यह निरंतर यातनापूर्ण यात्रा है।

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