का सरल उत्तर
पिंडदान के अभाव में जीवात्मा कल्पान्त तक प्रेत बनकर निर्जन वन में भटकती है। यममार्ग पर चलने की शक्ति नहीं मिलती, भूख-प्यास से व्याकुल रहती है। इसीलिए मृत्यु के बाद दस दिन तक पिंडदान का विधान है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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