का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में चित्रगुप्त कहते हैं — यमराज मूर्ख-पंडित, दरिद्र-धनवान, सबल-निर्बल — सभी से समान व्यवहार करते हैं क्योंकि यमलोक में केवल कर्म देखे जाते हैं, धन या पद नहीं।
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