का सरल उत्तर
इस एक व्रत को करने से 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यह व्रत कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों को ठीक करता है और व्यक्ति को वैकुंठ धाम ले जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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