ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · अर्जुन विषाद योग

श्लोक 24

अर्जुन विषाद योग · Arjuna Vishada Yoga

मूल पाठ

सञ्जय उवाच | एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत | सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

संजय बोले - हे भरतवंशी राजन्! निद्राविजयी अर्जुन के द्वारा इस तरह कहने पर अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के मध्यभाग में पितामह भीष्म और आचार्य द्रोण के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने श्रेष्ठ रथ को खड़ा करके इस तरह कहा कि 'हे पार्थ! इन इकट्ठे हुए कुरुवंशियोंको देख'।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

संजय बोले - हे भरतवंशी राजन्! निद्राविजयी अर्जुन के द्वारा इस तरह कहने पर अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के मध्यभाग में पितामह भीष्म और आचार्य द्रोण के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने श्रेष्ठ रथ को खड़ा करके इस तरह कहा कि 'हे पार्थ! इन इकट्ठे हुए कुरुवंशियोंको देख'।

English Meaning

Sanjaya said Thus addressed by Arjuna, Krishna, having stationed that best of chariots, O Dhritarashtra, in the midst of the two armies.

Sanjaya said Thus addressed by Arjuna, Krishna, having stationed that best of chariots, O Dhritarashtra, in the midst of the two armies.

आगे पढ़ें — अर्जुन विषाद योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता