अर्जुन उवाच | प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च | एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव
अर्थ: No Translation
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga
ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते | ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम्
वह परमात्मा सम्पूर्ण ज्योतियोंका भी ज्योति और अज्ञानसे अत्यन्त परे कहा गया है। वह ज्ञानस्वरूप, जाननेयोग्य, ज्ञान(साधन-समुदाय) से प्राप्त करनेयोग्य और सबके हृदयमें विराजमान है।
वह परमात्मा सम्पूर्ण ज्योतियोंका भी ज्योति और अज्ञानसे अत्यन्त परे कहा गया है। वह ज्ञानस्वरूप, जाननेयोग्य, ज्ञान(साधन-समुदाय) से प्राप्त करनेयोग्य और सबके हृदयमें विराजमान है।
That, the Light of all lights, is said to be beyond darkness: knowledge, the knowable and the goal of knowledge, seated in the hearts of all.
That, the Light of all lights, is said to be beyond darkness: knowledge, the knowable and the goal of knowledge, seated in the hearts of all.
आगे पढ़ें — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता