ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 28

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga

मूल पाठ

समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम् | विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो नष्ट होते हुए सम्पूर्ण प्राणियोंमें परमात्माको नाशरहित और समरूपसे स्थित देखता है, वही वास्तवमें सही देखता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो नष्ट होते हुए सम्पूर्ण प्राणियोंमें परमात्माको नाशरहित और समरूपसे स्थित देखता है, वही वास्तवमें सही देखता है।

English Meaning

He sees, who sees the Supreme Lord, existing eally in all beings, the unperishing within the perishing.

He sees, who sees the Supreme Lord, existing eally in all beings, the unperishing within the perishing.

आगे पढ़ें — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता